मारबर्ग वायरस 2022 (Marburg Virus) Symptoms, Treatment, Cases, death

मारबर्ग वायरस  (मारबर्ग वायरस क्या है, कैसे फैलता है, लक्षण, टेस्ट, इलाज, बचाओ कैसे करें,  केस) Marburg Virus in hindi (treatment, cases, symptoms)

कोरोना महामारी के कारण हर किसी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। जिसका असर आज भी लोगों के बीच देखने को मिल रहा है। लेकिन इस बार कोरोना किसी को नहीं डरा रहा बल्कि एक ऐसा वायरस आया है जिसने लोगों के बीच खौफ पैदा कर दिया है। इस वायरस का नाम है मारबर्ग वायरस। इसकी ना ही कोई वैक्सीन है और ना ही इलाज के बारे में कुछ पता है। ऐसे में इस वायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ काफी चिंता में दिखाई दे रहा है। डब्लयूएचओ का कहना है कि, इसके सबसे पहले मामले घाना में देखने को मिले हैं। उनका कहना है कि, ये बीमारी कोरोना और इबोला से काफी खतरनाक है। जो चमगादड़ो के कारण हो रही है।Marburg Virus

मारबर्ग वायरस 2022 (Marburg Virus)

हानिकारक और घातक है मारबर्ग वायरस

मारबर्ग वायरस काफी हानिकारक और घातक है। जिसपर डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, घाना से पहले ये अंगोला, कांगो, केन्या, दक्षिण अफ्रीका और युगांडा में पाया गया है। जिसको लेकर काफी क्वारंटीन कर दिया गया है। वहीं जिन लोगों की हालत गंभीर है उन्हें अस्पताल भेज दिया गया है।

मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) से इतने लोग पाए गए संक्रमित

आपको बता दें कि, जो रिपोर्ट सामने आई है उसके मुताबिक 98 लोग अभी तक संक्रमित पाए गए हैं। जिसको ध्यान में रखते हुए घाना के स्वास्थ्य विभाग ने कुछ सख्ती कर दी है। ताकि इस संक्रमण को एक जगह ही रोक दिया जाए। उनका कहना है कि, जितना हो सके हम इसे रोकने पर काम कर रहे हैं ताकि इस संख्या को रोका जा सके।

मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) में पाए जाने वाले लक्षण

• इस वायरस का इंफेक्शन 2 से 21 दिनों तक रहता है। जिसके कारण वायरस समय-समय पर अपना रूप बदलता है।

• इसमें आपको तेज बुखार, तेज सिरदर्द और बहुत कमजोरी होना शुरू हो जाता है। जिसके कारण लोगों की तकलीफ और ज्यादा बढ़ जाती है।

• मांसपेशियों में दर्द और तीसरे दिन दस्त और ऐंठन, उल्टी होनी शुरू हो जाती है। जिससे बॉडी काफी वीक हो जाती है।

• इस वायरस का असर आपके इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। जिसके कारण चेहरे और आंखों का रंग भी बदल जाता है।

• कुछ दिन बाद उल्टी और मल में खून आना शुरू हो जाता है। वहीं मसूड़ों और योनी से भी खून बहने लगता है।

• जब ये वायरस अधिक ज्यादा बढ़ जाता है तो आपकी स्थिति और घातक हो जाती है। जिसके कारण मृत्यृ का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में ये चिंता का विषय बन जाता है।

मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) में होते हैं कौन से टेस्ट

• एंटीजन-कैप्चर डिटेक्शन टेस्ट इसके जरिए ये पता लगाया जाता है कि, कही आपको मलेरिया तो नहीं है।

• सीरम न्यूट्रलाइजेशन टेस्ट से ये पता लगाया जाता है कि, संक्रमण कहा तक फैला हुआ है।

• रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) टेस्ट से ये पता लगाया जाता है कि, आपका संक्रमण पॉजिटीव है या नहीं।

• इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से ये पता लगाया जाता है कि, ये संक्रमण कही आपके लंग्स तक तो नहीं पहुंच सकता।

• सेल कल्चर द्वारा वायरस आइसोलेशन से ये पता लगाया जाता है कि, आपके कोई सेल्स तो डेमेज नहीं हो रहे है।

मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) का इलाज और बचाव

मारबर्ग वायरस से संक्रमित होने के कारण हर तरफ एक परेशानी का माहौल पैदा हो जाता है। जिसके कारण ये पता लगाया जा सके कि इसका इलाज और बचाब कैसे किया जा सके। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अभी तक इसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है जिसके कारण इससे बचाब करना भी काफी मुश्किल हो गया है। ऐसे में बस आपको मास्क और आइसोलेट होने के कारण कुछ नहीं करना होगा। अगर आप संक्रमित है तो क्वारंटीन होना चाहिए। ताकि ये वायरस किसी और को ना हो।

मारबर्ग वायरस (Marburg Virus)  से पहले भी हुए लोग शिकार

इस वायरस से 2005 में अंगोला में 200 लोगों को संक्रमित किया गया था। जिसके कारण इन लोगों की जान गई। यही कारण है कि, अब इसे खतरनाक वायरस माना जा रहा है। आपको बता दें कि, इसका प्रकोप सबसे पहले 1967 में जर्मनी में देखा गया था।

मारबर्ग वायरस (Marburg Virus)  के लिए भारत के बचाव

भारत में ये वायरस ना फैले इसके लिए सरकार की ओर से टेस्टिंग को और ज्यादा बढ़ा दिया गया है। जिसके कारण अगर किसी भी व्यक्ति को इसके लक्षण दिखाई दें तो उसका तुरंत टेस्ट कराया जाएगा। इसी के साथ उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा।

FAQ

Q- मारबर्ग वायरस के कहां पाए गए मामले?

Ans- घाना से पहले ये अंगोला, कांगो, केन्या, दक्षिण अफ्रीका और युगांडा में पाया गया है।

Q- मारबर्ग वायरस से कितने लोग हुए संक्रमित ?

Ans- अभी तक 98 लोग हुए संक्रमित।

Q- मारबर्ग वायरस का क्या है इलाज?

Ans- इस वायरस का अब तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है।

Q- मारबर्ग वायरस सबसे पहले कब पाया गया था?

Ans- इस वायरस को 1967 में जर्मनी में पाया गया था।

Q- मारबर्ग वायरस के क्या है लक्षण?

Ans- सिरदर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, खून की उल्टी और खून का बहना आदि।

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